नमस्ते दोस्तों! आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सेहत का ध्यान रखना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है अपनी और अपने परिवार की वित्तीय सुरक्षा का भी खयाल रखना। आजकल लोग पूछते हैं कि बीमारी बीमा आखिर किस उम्र में लेना सबसे सही रहता है?
क्या कम उम्र में लेने से कोई फायदा है या बढ़ती उम्र में भी इसके बारे में सोचना चाहिए? आपने भी ज़रूर सोचा होगा कि क्या कोई ऐसी उम्र होती है जब बीमारी बीमा लेना सबसे बढ़िया होता है, है ना?
मैंने खुद महसूस किया है कि सही समय पर लिया गया बीमा भविष्य की कई अनिश्चितताओं से बचाता है. आज के दौर में बढ़ती स्वास्थ्य लागतों को देखते हुए यह फैसला और भी अहम हो जाता है.
चलिए, इस पर थोड़ा गहराई से विचार करते हैं और जानते हैं कि कब और कैसे बीमारी बीमा का चुनाव करना आपके लिए सबसे फायदेमंद हो सकता है. इस लेख में हम इसी विषय पर सटीक जानकारी जानेंगे।
छोटी उम्र में बीमा का अनमोल फायदा

कम उम्र में बीमारी बीमा लेने का मतलब है कि आपने अपनी सेहत और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की नींव बहुत मज़बूती से रख दी है। सोचिए, जब हम युवा होते हैं, तो आमतौर पर हमारी सेहत अच्छी रहती है। यही वो समय होता है जब बीमा कंपनियां हमें कम प्रीमियम पर बेहतर कवरेज देने को तैयार होती हैं। मेरा अपना अनुभव कहता है कि मैंने जब पहली बार बीमा लिया था, तब मैं सिर्फ पच्चीस साल का था और उस वक्त मुझे बहुत कम प्रीमियम देना पड़ा था। आज जब मैं चालीस का हो गया हूँ, तो मुझे वही कवरेज काफी ज़्यादा प्रीमियम पर मिलेगा। युवावस्था में बीमा लेने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको ‘वेटिंग पीरियड’ की चिंता कम होती है। कई पॉलिसियों में कुछ बीमारियों के लिए 2-4 साल का वेटिंग पीरियड होता है, यानी आपको इतने समय तक इंतज़ार करना पड़ता है। अगर आपने जवानी में ही बीमा ले लिया, तो ये वेटिंग पीरियड कब पूरे हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता। भविष्य में अगर कोई गंभीर बीमारी आती है, तो आप पूरी तरह तैयार होते हैं। साथ ही, कम उम्र में आमतौर पर हमें कोई पुरानी बीमारी नहीं होती, जिससे बीमा कराना और भी आसान हो जाता है और क्लेम मिलने में भी कोई परेशानी नहीं आती। यह एक ऐसा फैसला है जो आपको जीवनभर आर्थिक तनाव से दूर रख सकता है।
कम प्रीमियम का लाभ
युवावस्था में जब स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होते हैं, बीमा कंपनियां स्वाभाविक रूप से कम प्रीमियम चार्ज करती हैं। यह आपके मासिक या वार्षिक बजट पर बोझ नहीं डालता और आप आसानी से एक अच्छी पॉलिसी खरीद सकते हैं। मैंने कई बार देखा है कि लोग इस फायदे को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और बाद में पछताते हैं जब प्रीमियम बहुत बढ़ जाते हैं।
लंबी अवधि का कवरेज
कम उम्र में बीमा खरीदने से आपको जीवन के बड़े हिस्से के लिए सुरक्षा मिल जाती है। इससे आप लंबे समय तक वित्तीय सुरक्षा की भावना के साथ जी सकते हैं। यह आपको मानसिक शांति देता है कि आप और आपके परिवार की स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें पूरी हो जाएंगी, चाहे भविष्य में कुछ भी हो।
बढ़ती उम्र के साथ बीमा की आवश्यकता और मुश्किलें
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता जाता है। तीस के बाद और चालीस के करीब आते-आते हमारे शरीर में छोटे-मोटे बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। शुगर, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां आम होने लगती हैं और ऐसे में बीमा लेना थोड़ा मुश्किल और महंगा हो जाता है। मेरा एक दोस्त है, उसने 45 की उम्र में बीमा लेने का सोचा, लेकिन तब तक उसे ब्लड प्रेशर की शिकायत हो चुकी थी। बीमा कंपनी ने न सिर्फ उसका प्रीमियम बढ़ाया, बल्कि कुछ खास शर्तों के साथ ही पॉलिसी दी। यह दिखाता है कि देर करने का नुकसान कितना बड़ा हो सकता है। बढ़ती उम्र में बीमा लेने से प्रीमियम काफी ज़्यादा हो जाता है क्योंकि बीमा कंपनियां जोखिम को ज़्यादा मानती हैं। साथ ही, पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing diseases) के लिए वेटिंग पीरियड भी लंबा हो सकता है, या कुछ मामलों में तो कवरेज मिलता ही नहीं। ऐसे में, अगर आप बढ़ती उम्र में बीमा लेने की सोच रहे हैं, तो आपको एक विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए ताकि आप सही पॉलिसी का चुनाव कर सकें जो आपकी ज़रूरतों के हिसाब से हो। यह एक ऐसा निर्णय है जिसमें देरी करना आपको भविष्य में बहुत महंगा पड़ सकता है।
बढ़ते प्रीमियम का बोझ
अधिक उम्र में बीमा खरीदने पर प्रीमियम काफी बढ़ जाता है क्योंकि स्वास्थ्य जोखिम अधिक होते हैं। यह आपके बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। मैंने ऐसे कई लोग देखे हैं जिन्हें बाद में महंगा प्रीमियम चुकाना पड़ा।
प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों की चुनौती
अगर आपको कोई पहले से मौजूद बीमारी है, तो बीमा कंपनी या तो इसे कवर करने से मना कर सकती है, या इसके लिए लंबा वेटिंग पीरियड लगा सकती है। यह एक बड़ी चुनौती है जो आपको सही समय पर बीमा लेने से रोकती है।
सही स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी कैसे चुनें?
बीमा सिर्फ लेना ही काफी नहीं, बल्कि सही पॉलिसी का चुनाव करना भी बेहद ज़रूरी है। आज बाज़ार में ढेरों विकल्प मौजूद हैं, ऐसे में भ्रमित होना स्वाभाविक है। मैंने जब अपने परिवार के लिए पॉलिसी चुनी थी, तब मैंने कई कंपनियों की तुलना की, उनके नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ीं। सबसे पहले, अपनी और अपने परिवार की ज़रूरतों को समझें। आपको कितना कवरेज चाहिए?
क्या आपको फैमिली फ्लोटर प्लान चाहिए या व्यक्तिगत? अस्पताल के खर्चे, दवाओं का खर्चा, एम्बुलेंस का खर्चा – ये सब कवरेज में शामिल हैं या नहीं, यह देखना ज़रूरी है। मेरी सलाह है कि आप किसी भरोसेमंद बीमा सलाहकार से ज़रूर बात करें। वे आपको विभिन्न पॉलिसियों की खूबियां और कमियां बताकर सही चुनाव में मदद कर सकते हैं। ऑनलाइन रिसर्च करना भी अच्छा है, लेकिन विशेषज्ञ की सलाह हमेशा फायदेमंद होती है। क्लेम सेटलमेंट रेशियो (Claim Settlement Ratio) भी देखना न भूलें – यह बताता है कि कंपनी कितनी तेज़ी से और आसानी से क्लेम पास करती है। यह सुनिश्चित करें कि पॉलिसी में नेटवर्क अस्पतालों की सूची आपके रहने की जगह के आसपास के अच्छे अस्पतालों को कवर करती हो।
ज़रूरतों का आकलन
अपनी और अपने परिवार की स्वास्थ्य ज़रूरतों का सही आकलन करें। क्या आपको मैटरनिटी कवरेज चाहिए, या गंभीर बीमारियों के लिए अतिरिक्त कवरेज? आपकी ज़रूरतों के हिसाब से ही पॉलिसी चुनें।
कंपनी की विश्वसनीयता
बीमा कंपनी की क्लेम सेटलमेंट रेशियो और उसकी बाज़ार में साख ज़रूर देखें। एक अच्छी क्लेम सेटलमेंट रेशियो वाली कंपनी पर आप ज़्यादा भरोसा कर सकते हैं।
वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार: बीमारी बीमा
बीमारी बीमा सिर्फ एक खर्च नहीं, बल्कि एक निवेश है जो आपको भविष्य की अनिश्चितताओं से बचाता है। मेरा खुद का अनुभव है कि कुछ साल पहले मेरे पिताजी को एक बड़ी सर्जरी की ज़रूरत पड़ी थी। अगर हमारे पास बीमा नहीं होता, तो शायद हमें अपनी सारी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ती या कर्ज़ लेना पड़ता। लेकिन, बीमा होने के कारण हम बिना किसी आर्थिक तनाव के उनका इलाज करवा पाए। यह वाकई एक बहुत बड़ी राहत थी। आज के समय में स्वास्थ्य सेवाओं की लागत इतनी बढ़ गई है कि एक छोटी सी बीमारी का इलाज भी लाखों में जा सकता है। ऐसे में, अगर आपके पास बीमारी बीमा है, तो आप बिना किसी चिंता के सबसे अच्छा इलाज करवा सकते हैं। यह न सिर्फ आपको आर्थिक रूप से सुरक्षित रखता है, बल्कि आपको मानसिक शांति भी देता है। आप जानते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, आपके पास एक सुरक्षा कवच है जो आपको और आपके परिवार को संभालेगा। इसलिए, इसे सिर्फ एक पॉलिसी नहीं, बल्कि एक वित्तीय सुरक्षा जाल समझें जो आपके सबसे मुश्किल समय में काम आता है।
अप्रत्याशित खर्चों से बचाव
जीवन में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। बीमारी बीमा आपको अप्रत्याशित स्वास्थ्य खर्चों से बचाता है, जिससे आपकी बचत सुरक्षित रहती है और आपको कर्ज़ लेने की नौबत नहीं आती।
सर्वोत्तम चिकित्सा का अधिकार
बीमा होने पर आप बिना पैसों की चिंता किए, सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधाएँ प्राप्त कर सकते हैं। यह आपको मानसिक शांति प्रदान करता है कि आपके प्रियजनों को हमेशा बेहतरीन इलाज मिलेगा।
पारिवारिक फ्लोटर प्लान: पूरे परिवार की चिंता मुक्त सुरक्षा
पारिवारिक फ्लोटर प्लान उन परिवारों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जहाँ सभी सदस्यों को एक ही पॉलिसी के तहत कवर किया जा सकता है। मैंने अपने परिवार के लिए यही प्लान चुना था क्योंकि इससे सभी सदस्यों को एक ही सम-इंश्योर्ड (Sum Insured) के तहत कवरेज मिल जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आमतौर पर व्यक्तिगत पॉलिसियों की तुलना में सस्ता पड़ता है और एक ही पॉलिसी को मैनेज करना भी आसान होता है। मान लीजिए, मेरे घर में मैं, मेरी पत्नी और दो बच्चे हैं। एक फैमिली फ्लोटर प्लान लेने से हम चारों एक ही प्रीमियम पर कवर हो जाते हैं। अगर किसी को ज़रूरत पड़ती है, तो पूरी बीमा राशि का इस्तेमाल किया जा सकता है। हां, लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अगर एक ही साल में परिवार के कई सदस्य बीमार पड़ जाते हैं और कवरेज राशि खत्म हो जाती है, तो बाकी सदस्यों को मुश्किल हो सकती है। इसलिए, सम-इंश्योर्ड चुनते समय अपने परिवार की ज़रूरतों और उम्र का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। यह एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है जो पूरे परिवार को एक साथ आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
किफायती और सुविधाजनक

फैमिली फ्लोटर प्लान आमतौर पर व्यक्तिगत पॉलिसियों की तुलना में अधिक किफायती होते हैं और इन्हें एक साथ मैनेज करना भी आसान होता है। एक ही पॉलिसी से पूरे परिवार की ज़रूरतें पूरी हो जाती हैं।
लचीलापन और व्यापक कवरेज
यह प्लान लचीला होता है और परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा पूरी बीमा राशि का उपयोग किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि आपात स्थिति में सभी को पर्याप्त कवरेज मिले।
बीमा पॉलिसी खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान
बीमा पॉलिसी खरीदते समय हड़बड़ी बिल्कुल न करें। यह एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय है जिसके दूरगामी परिणाम होते हैं। सबसे पहले, पॉलिसी के ‘नियम और शर्तें’ (Terms and Conditions) ध्यान से पढ़ें। बारीक अक्षरों में लिखी बातें अक्सर सबसे महत्वपूर्ण होती हैं। मैंने अपने क्लाइंट्स को हमेशा सलाह दी है कि पॉलिसी खरीदने से पहले सभी दस्तावेज़ों को अच्छी तरह से समझना ज़रूरी है। ‘को-पेमेंट क्लॉज़’ (Co-payment Clause), ‘सब-लिमिट्स’ (Sub-limits) और ‘रूम रेंट लिमिट’ (Room Rent Limit) जैसी चीज़ों को ध्यान से देखें। को-पेमेंट का मतलब है कि क्लेम के समय आपको कितना प्रतिशत खर्च खुद उठाना होगा। सब-लिमिट्स कुछ खास बीमारियों या प्रक्रियाओं पर लगाए गए अधिकतम खर्च की सीमा होती हैं। ये सभी बातें आपके क्लेम के समय बहुत मायने रखती हैं। इसके अलावा, बीमा कंपनी का ग्राहक सेवा अनुभव कैसा है, यह भी जानना ज़रूरी है। क्लेम के दौरान एक अच्छी ग्राहक सेवा बहुत मददगार साबित होती है। विभिन्न पॉलिसियों की तुलना करें और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से सबसे उपयुक्त पॉलिसी का चुनाव करें।
नियम और शर्तें समझना
पॉलिसी के सभी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें, खासकर ‘को-पेमेंट’, ‘सब-लिमिट्स’ और ‘रूम रेंट लिमिट’ जैसे क्लॉज़। यह आपके क्लेम अनुभव को प्रभावित कर सकता है।
ग्राहक सेवा और नेटवर्क अस्पताल
बीमा कंपनी की ग्राहक सेवा और उसके नेटवर्क अस्पतालों की सूची की जाँच करें। एक अच्छी ग्राहक सेवा और व्यापक नेटवर्क आपको आपात स्थिति में बहुत मदद करेगा।
पुरानी बीमारियों (Pre-existing diseases) का समाधान
अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो बीमा लेते समय इसे छिपाने की गलती कभी न करें। यह एक ऐसी गलती है जिसका खामियाज़ा बाद में बहुत भारी पड़ सकता है और आपका क्लेम भी रिजेक्ट हो सकता है। मेरे एक परिचित ने अपनी शुगर की बीमारी को छिपाया था, और बाद में जब उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, तो बीमा कंपनी ने उनका क्लेम अस्वीकार कर दिया। यह स्थिति बहुत ही निराशाजनक होती है। इसलिए, हमेशा अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री बीमा कंपनी को ईमानदारी से बताएं। भले ही इसके कारण प्रीमियम थोड़ा बढ़ जाए या वेटिंग पीरियड लगे, लेकिन पारदर्शिता हमेशा बेहतर होती है। बीमा कंपनियां अक्सर पुरानी बीमारियों के लिए एक निश्चित वेटिंग पीरियड (जैसे 2 से 4 साल) रखती हैं, जिसके बाद वे इन बीमारियों को कवर करती हैं। कुछ पॉलिसियां ऐसी भी होती हैं जो पुरानी बीमारियों के लिए विशेष कवरेज प्रदान करती हैं, लेकिन उनका प्रीमियम ज़्यादा होता है। ऐसे में, किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर अपनी स्थिति के अनुसार सबसे अच्छी पॉलिसी का चुनाव करें। ईमानदारी से दी गई जानकारी ही आपको भविष्य में होने वाली परेशानियों से बचाएगी।
ईमानदारी और पारदर्शिता
अपनी मेडिकल हिस्ट्री को बीमा कंपनी से कभी न छिपाएँ। पूरी ईमानदारी से सभी जानकारी दें, भले ही इससे प्रीमियम थोड़ा बढ़े या वेटिंग पीरियड लगे।
विशेष पॉलिसियों की खोज
अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है, तो उन बीमा पॉलिसियों की तलाश करें जो विशेष रूप से ऐसी बीमारियों के लिए कवरेज प्रदान करती हैं, भले ही उनके नियम थोड़े अलग हों।
अचानक आने वाली मुसीबत से खुद को कैसे बचाएं?
जीवन में अनिश्चितताएं हमेशा बनी रहती हैं, और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां कब आ जाएं, कोई नहीं जानता। मेरा मानना है कि बीमारी बीमा एक तरह का ‘सुरक्षा जाल’ है जो आपको अचानक आने वाली वित्तीय मुसीबतों से बचाता है। सोचिए, अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अचानक किसी बड़ी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़े, और आपके पास बीमा न हो तो क्या होगा?
शायद आपको अपनी जमापूंजी तोड़नी पड़ेगी, या दोस्तों-रिश्तेदारों से मदद मांगनी पड़ेगी, या फिर कर्ज़ लेना पड़ेगा। ये सभी विकल्प आपको मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ सकते हैं। बीमारी बीमा लेकर आप खुद को इन सब परेशानियों से बचा सकते हैं। यह आपको यह विश्वास दिलाता है कि आप और आपका परिवार किसी भी स्वास्थ्य संकट का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह सिर्फ पैसे बचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह आपके और आपके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने का एक तरीका है। इसलिए, आज ही इस पर विचार करें और अपनी ज़रूरतों के अनुसार एक अच्छी पॉलिसी चुनें।
| तुलनात्मक पहलू | कम उम्र में बीमा (20-30 साल) | बढ़ती उम्र में बीमा (40-50 साल+) |
|---|---|---|
| प्रीमियम | बहुत कम और किफायती | काफी ज़्यादा और महंगा |
| कवरेज और शर्तें | व्यापक कवरेज, कम वेटिंग पीरियड, लचीली शर्तें | सीमित कवरेज, लंबा वेटिंग पीरियड, कठोर शर्तें |
| मेडिकल चेक-अप | अक्सर ज़रूरी नहीं या बहुत सामान्य | अक्सर अनिवार्य और विस्तृत |
| पहले से मौजूद बीमारियाँ | शून्य या बहुत कम संभावना, आसानी से कवर | उच्च संभावना, कवर करने में मुश्किल या लंबा वेटिंग पीरियड |
| टैक्स लाभ | लंबी अवधि तक लाभ उठाया जा सकता है | लाभ सीमित अवधि के लिए |
글을माचिमय
यह तो साफ़ है कि बीमारी बीमा सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपके और आपके परिवार के भविष्य की सुरक्षा का एक मजबूत कवच है। मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि सही समय पर लिया गया बीमा आपको न केवल आर्थिक मुश्किलों से बचाता है, बल्कि मानसिक शांति भी देता है। आज हमने देखा कि कम उम्र में बीमा लेने के कितने अनमोल फायदे हैं और बढ़ती उम्र में क्या चुनौतियाँ आ सकती हैं। तो दोस्तों, इस महत्वपूर्ण फैसले को टालिए मत। अपनी ज़रूरतों को समझिए, रिसर्च कीजिए और आज ही अपने लिए सबसे अच्छी पॉलिसी का चुनाव कीजिए।
जानने योग्य उपयोगी जानकारी
1. कम उम्र में स्वास्थ्य बीमा लेने से आपको कम प्रीमियम और व्यापक कवरेज का लाभ मिलता है, जिससे लंबे समय तक वित्तीय सुरक्षा बनी रहती है।
2. बढ़ती उम्र के साथ प्रीमियम में वृद्धि और पहले से मौजूद बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड जैसी चुनौतियाँ बढ़ जाती हैं, इसलिए देर न करें।
3. पॉलिसी चुनते समय कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेशियो, नेटवर्क अस्पताल और आपकी व्यक्तिगत ज़रूरतों का गहनता से आकलन करें।
4. फैमिली फ्लोटर प्लान पूरे परिवार के लिए एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प हो सकता है, लेकिन सम-इंश्योर्ड का चुनाव सावधानी से करें।
5. अपनी मेडिकल हिस्ट्री को पूरी ईमानदारी से बीमा कंपनी को बताएं ताकि भविष्य में क्लेम के दौरान कोई समस्या न हो।
महत्वपूर्ण बातों का सारांश
दोस्तों, आज हमने बीमारी बीमा के महत्व और इसे कब लेना चाहिए, इस पर विस्तार से चर्चा की। मैंने आपको बताया कि कैसे कम उम्र में बीमा लेने से आपको प्रीमियम में बचत होती है और आप लंबी अवधि के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। वहीं, अगर आप देर करते हैं, तो आपको ज़्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है और कुछ बीमारियों के कवरेज में भी दिक्कत आ सकती है। यह भी ज़रूरी है कि आप सही पॉलिसी का चुनाव करें, जिसके लिए आपको अपनी ज़रूरतों को समझना होगा और बीमा कंपनी की विश्वसनीयता पर ध्यान देना होगा। याद रखिए, बीमारी बीमा सिर्फ एक खर्च नहीं है, बल्कि आपके और आपके परिवार के स्वास्थ्य और वित्तीय भविष्य के लिए एक समझदारी भरा निवेश है। यह अचानक आने वाली स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों से आपको बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसलिए, बिना देर किए आज ही इस दिशा में कदम उठाएं और अपने भविष्य को सुरक्षित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: बीमारी बीमा खरीदने की सबसे सही उम्र क्या है?
उ: अरे वाह! यह सवाल तो हर कोई पूछता है, और मेरा अपना अनुभव कहता है कि बीमारी बीमा लेने की कोई “एक” तय उम्र नहीं होती। लेकिन हाँ, मैं हमेशा यही कहूँगी कि जितनी जल्दी हो सके, ले लो!
जैसे ही आप अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी या व्यवसाय शुरू करते हैं, यानी लगभग 20 से 30 साल की उम्र में, तभी बीमा ले लेना सबसे समझदारी भरा कदम होता है. मैंने खुद देखा है कि इस उम्र में प्रीमियम बहुत कम होता है और आपको बिना किसी मेडिकल जांच के या बहुत मामूली जांच के आसानी से पॉलिसी मिल जाती है.
इस उम्र में स्वास्थ्य जोखिम कम होते हैं, इसलिए बीमा कंपनियां कम प्रीमियम लेती हैं. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जाता है और फिर प्रीमियम भी ज्यादा लगता है.
तो सोचो मत, बस ले लो! यह एक ऐसा निवेश है जो आपकी और आपके परिवार की भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, और सबसे अच्छी बात ये कि बाद में पछताने से बच जाओगे.
प्र: कम उम्र में बीमारी बीमा लेने के क्या बड़े फायदे हैं?
उ: कम उम्र में बीमारी बीमा लेने के इतने सारे फायदे हैं कि मैं क्या बताऊं! सबसे पहला और सबसे बड़ा फायदा है कम प्रीमियम. जब आप युवा और स्वस्थ होते हैं, तो बीमा कंपनियों को आप में कम जोखिम दिखता है, और इसलिए वे आपसे बहुत कम प्रीमियम लेती हैं.
यह तो सीधे-सीधे पैसों की बचत है! दूसरा बड़ा फायदा है “प्रतीक्षा अवधि” (Waiting Period) का सही इस्तेमाल. ज़्यादातर पॉलिसियों में कुछ बीमारियों के लिए 2-4 साल की प्रतीक्षा अवधि होती है, खासकर पहले से मौजूद बीमारियों के लिए.
अगर आप कम उम्र में पॉलिसी लेते हैं, तो यह प्रतीक्षा अवधि बिना किसी दिक्कत के निकल जाती है, क्योंकि इस उम्र में आमतौर पर आपको गंभीर बीमारियां नहीं होतीं.
मैंने अपने एक दोस्त को देखा है जिसने युवावस्था में बीमा लिया था और उसे बाद में कोई स्वास्थ्य समस्या होने पर बिना किसी परेशानी के कवरेज मिला, क्योंकि उसकी प्रतीक्षा अवधि पूरी हो चुकी थी.
तीसरा, आपको “नो-क्लेम बोनस” (No-Claim Bonus) का फायदा मिलता है. अगर आप सालों तक कोई क्लेम नहीं करते, तो आपकी बीमा राशि बढ़ती जाती है, और यह आपके लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.
इसके अलावा, आपको व्यापक कवरेज विकल्प भी मिलते हैं, जिनमें कई बार मैटरनिटी बेनिफिट्स भी शामिल होते हैं, जो परिवार शुरू करने वालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
प्र: क्या बढ़ती उम्र में बीमारी बीमा लेना अभी भी फायदेमंद है और क्या बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उ: बिलकुल! बढ़ती उम्र में भी बीमारी बीमा लेना न केवल फायदेमंद है, बल्कि और भी ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है. मेरी एक रिश्तेदार ने 60 साल की उम्र में बीमा लिया था और बाद में उन्हें एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा, तब उन्हें एहसास हुआ कि यह कितना महत्वपूर्ण फैसला था.
हालांकि, बढ़ती उम्र में प्रीमियम थोड़ा ज़्यादा हो सकता है और आपको कुछ मेडिकल टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं. लेकिन चिंता मत करो, IRDAI के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब किसी भी उम्र का व्यक्ति नई बीमा पॉलिसी खरीद सकता है, आयु सीमा हटा दी गई है.
ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, ऐसी पॉलिसी चुनें जिसका “दावा निपटान अनुपात” (Claim Settlement Ratio) अच्छा हो, यानी जो कंपनी आसानी से और जल्दी क्लेम पास करती हो.
दूसरा, पॉलिसी में “प्रतीक्षा अवधि” (Waiting Period) पर ध्यान दें, खासकर पहले से मौजूद बीमारियों के लिए, क्योंकि यह 12 महीने से 36 महीने तक हो सकती है.
कोशिश करें कि कम प्रतीक्षा अवधि वाली योजना चुनें, या अगर संभव हो तो ऐड-ऑन कवर लेकर इसे कम करा लें. तीसरा, “नेटवर्क अस्पताल” (Network Hospitals) की सूची ज़रूर देखें, ताकि कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सके.
चौथा, पॉलिसी के बहिष्करणों (Exclusions) को ध्यान से पढ़ें, ताकि बाद में कोई अप्रत्याशित खर्च न आए. अंत में, केवल प्रीमियम ही न देखें, बल्कि व्यापक कवरेज और मिलने वाले लाभों को प्राथमिकता दें.
क्योंकि सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं, है ना?





