हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम घटाने के वो गुप्त उपाय, जो आपको पता होने चाहिए!

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नमस्ते दोस्तों! आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं जो हम सभी के लिए बेहद ज़रूरी है – हमारा स्वास्थ्य और उसे सुरक्षित रखने वाला स्वास्थ्य बीमा। आजकल चिकित्सा खर्च जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का होना कितना अहम है, ये तो आप सब जानते ही होंगे। लेकिन, क्या आप भी महंगे प्रीमियम देखकर थोड़ा घबरा जाते हैं?

मुझे पता है, कई बार लगता है कि अच्छी कवरेज के साथ बचत करना नामुमकिन है, पर ऐसा बिल्कुल नहीं है! हाल ही में आए कुछ बदलावों और स्मार्ट तरीकों से आप अपने प्रीमियम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। मैंने खुद इन पर गौर किया है और पाया है कि सही जानकारी हो तो पैसों की बचत करना कोई मुश्किल काम नहीं। तो चलिए, आज मिलकर स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम बचाने के कुछ अद्भुत तरीके जानते हैं!

अपनी ज़रूरतों को समझें, सही पॉलिसी चुनें

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परिवार की ज़रूरतों का सही आकलन

दोस्तों, सबसे पहले जो चीज़ हमें समझनी चाहिए वो है हमारी अपनी और हमारे परिवार की असल ज़रूरतें। अक्सर हम दूसरों को देखकर या एजेंट की बातों में आकर एक ऐसा प्लान ले लेते हैं जिसकी शायद हमें पूरी तरह से ज़रूरत ही नहीं होती। मेरा अनुभव कहता है कि हर परिवार की अपनी अलग ज़रूरतें होती हैं – किसी को कम कवरेज चाहिए तो किसी को ज़्यादा, किसी के परिवार में बुजुर्ग सदस्य हैं जिन्हें विशेष कवरेज की ज़रूरत है, तो किसी के परिवार में छोटे बच्चे हैं। इसलिए, पॉलिसी खरीदने से पहले अपनी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, भविष्य में संभावित ज़रूरतों और परिवार के सदस्यों की उम्र पर गहराई से विचार करना बहुत ज़रूरी है। ऐसा करने से आप अनावश्यक एड-ऑन या ऐसी कवरेज से बच सकते हैं जिनकी आपको ज़रूरत नहीं है, और अंततः यह आपके प्रीमियम को कम करने में मदद करेगा। याद रखें, एक सही और अनुकूल पॉलिसी का चुनाव ही प्रीमियम बचत की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है। मैंने खुद देखा है कि लोग अक्सर हड़बड़ी में कोई भी प्लान ले लेते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि वे या तो बहुत ज़्यादा प्रीमियम दे रहे हैं या फिर उनकी ज़रूरतों को पूरा करने वाली कवरेज उनके पास है ही नहीं।

अनावश्यक फीचर्स से बचें

बीमा पॉलिसी में कई बार ऐसे फैंसी फीचर्स होते हैं जो दिखने में तो बहुत आकर्षक लगते हैं, लेकिन असल में उनकी हमें कोई खास ज़रूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए, कुछ पॉलिसीज़ में अंतरराष्ट्रीय कवरेज या वैकल्पिक चिकित्सा के लिए बहुत व्यापक कवरेज होती है, जबकि हम में से ज़्यादातर लोग इनका शायद ही कभी इस्तेमाल करें। इन अतिरिक्त सुविधाओं के लिए आप अक्सर एक मोटा प्रीमियम चुकाते हैं। मेरी सलाह है कि आप केवल उन्हीं सुविधाओं पर ध्यान दें जो आपके लिए आवश्यक हैं। जैसे, अगर आपके परिवार में कोई पुरानी बीमारी का इतिहास नहीं है, तो शायद आपको बहुत उच्च क्रिटिकल इलनेस कवर की तुरंत ज़रूरत न हो। अगर आप किसी मेट्रो शहर में रहते हैं जहाँ मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल आसानी से उपलब्ध हैं, तो छोटे शहरों में भी कवरेज की सुविधा पर बहुत ज़्यादा प्रीमियम देना शायद समझदारी नहीं होगी। पॉलिसी दस्तावेज़ को ध्यान से पढ़ें और पूछें कि कौन सी सुविधा किस कीमत पर आ रही है। अगर आप मेरी बात मानें तो, केवल वही चुनें जो आपके लिए वास्तव में मायने रखता है, बाकी सब पर पैसे खर्च करने से बचें।

ऑनलाइन खरीद से पाएं ज़्यादा फायदे

सीधी डील, सीधे फायदे

मुझे याद है जब मैंने पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस ऑनलाइन खरीदा था। तब मुझे लगा था कि यह कितना आसान और फायदेमंद है! आज भी मैं यही कहूँगा कि ऑनलाइन पॉलिसी खरीदना आपके प्रीमियम को बचाने का एक बेहतरीन तरीका है। जब आप सीधे बीमा कंपनी की वेबसाइट से या किसी भरोसेमंद एग्रीगेटर पोर्टल से पॉलिसी खरीदते हैं, तो बिचौलियों का कोई कमीशन नहीं होता। इसका सीधा फायदा आपको डिस्काउंट के रूप में मिलता है। कई बीमा कंपनियां ऑनलाइन खरीदने पर विशेष छूट देती हैं, जो ऑफलाइन खरीदने पर नहीं मिलती। यह सिर्फ़ प्रीमियम बचत तक ही सीमित नहीं है, ऑनलाइन खरीदने पर आपको कई प्लान्स की तुलना एक साथ करने का मौका मिलता है। आप घर बैठे ही अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों के फीचर्स, कवरेज और प्रीमियम की तुलना कर सकते हैं। यह आपको एक सूचित निर्णय लेने में मदद करता है कि कौन सी पॉलिसी आपके लिए सबसे अच्छी है और सबसे सस्ती भी।

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तुलना की शक्ति का उपयोग करें

सच कहूँ तो, ऑनलाइन पोर्टल्स की सबसे बड़ी खूबी उनकी तुलना करने की शक्ति है। मैं हमेशा सलाह देता हूँ कि कोई भी पॉलिसी खरीदने से पहले कम से कम 3-4 अलग-अलग बीमा कंपनियों के प्लान्स की तुलना ज़रूर करें। ऑनलाइन एग्रीगेटर वेबसाइट्स आपको यह सुविधा मिनटों में दे देती हैं। आप अपनी ज़रूरतों के हिसाब से फ़िल्टर लगा सकते हैं, जैसे कि कवरेज राशि, परिवार के सदस्य, या किसी विशेष बीमारी का कवर। फिर आप देख सकते हैं कि कौन सी कंपनी सबसे कम प्रीमियम पर आपको वो सुविधाएं दे रही है जो आपको चाहिए। सिर्फ़ प्रीमियम ही नहीं, आपको क्लेम सेटलमेंट रेशियो, ग्राहकों की समीक्षाएं और कंपनी की विश्वसनीयता जैसी चीज़ों पर भी ध्यान देना चाहिए। यह सिर्फ़ सस्ता प्लान ढूंढने की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा सस्ता प्लान ढूंढने की बात है जो मुश्किल समय में आपके काम भी आए। मैंने खुद देखा है कि थोड़ी सी रिसर्च से कितनी बड़ी बचत की जा सकती है, और यह रिसर्च ऑनलाइन बहुत आसान हो जाती है।

नो क्लेम बोनस (NCB) का पूरा लाभ उठाएं

दावा-मुक्त वर्ष, प्रीमियम पर छूट

नो क्लेम बोनस, जिसे हम सब NCB के नाम से जानते हैं, हेल्थ इंश्योरेंस में प्रीमियम बचाने का एक अद्भुत तरीका है जिसका अक्सर लोग पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते। सीधे शब्दों में कहें तो, अगर आप लगातार क्लेम-फ्री रहते हैं, यानी बीमा कंपनी से कोई दावा नहीं करते हैं, तो बीमा कंपनी आपको अगले साल के प्रीमियम पर छूट देती है या आपकी कवरेज राशि बढ़ा देती है। यह एक तरह से आपको स्वस्थ रहने और छोटे-मोटे खर्चों के लिए क्लेम न करने के लिए प्रोत्साहित करती है। मैंने कई दोस्तों को देखा है जो छोटी-मोटी चीज़ों के लिए क्लेम करके अपना NCB गंवा देते हैं, जबकि अगर वे उन छोटे खर्चों को अपनी जेब से भरते तो अगले साल उन्हें प्रीमियम पर अच्छी खासी छूट मिल जाती। इसलिए, अगली बार जब भी कोई छोटा-मोटा बिल आए, तो सोचें कि क्या क्लेम करना वाकई ज़रूरी है या आप उसे खुद वहन कर सकते हैं ताकि आपका NCB बरकरार रहे और आपको भविष्य में बड़ी बचत हो सके।

छोटे क्लेम से बचें, बड़े फायदे पाएं

यह बात सुनकर आपको थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन छोटे-मोटे मेडिकल खर्चों के लिए क्लेम करने से बचना आपके लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। जैसे, अगर आपको मामूली बुखार या चोट लगी है और बिल 5,000-10,000 रुपये का आया है, तो शायद इसे अपनी जेब से भरना समझदारी होगी। क्यों?

क्योंकि अगर आप इस राशि का क्लेम करते हैं, तो आप अपना NCB खो सकते हैं, जिसका मतलब है कि अगले साल आपको अधिक प्रीमियम देना होगा। कुछ बीमा कंपनियां NCB के तहत कवरेज राशि भी बढ़ा देती हैं, जिससे आपको भविष्य में अधिक सुरक्षा मिलती है, वो भी बिना प्रीमियम बढ़ाए। मैंने व्यक्तिगत रूप से पाया है कि छोटे क्लेम से बचने का यह तरीका वाकई काम करता है। यह एक ऐसी रणनीति है जो आपकी बीमा कंपनी के साथ आपके संबंधों को भी मजबूत करती है और आपको एक जिम्मेदार पॉलिसीधारक के रूप में देखती है।

बचत का तरीका यह कैसे मदद करता है किसके लिए फायदेमंद है
उच्च डिडक्टिबल चुनें बीमा कंपनी का जोखिम कम होता है, जिससे प्रीमियम कम हो जाता है। जो लोग छोटे-मोटे खर्च खुद उठा सकते हैं और बड़ी आपातकालीन स्थिति के लिए कवरेज चाहते हैं।
नो क्लेम बोनस (NCB) बनाए रखें हर क्लेम-फ्री वर्ष के लिए प्रीमियम पर छूट मिलती है। जो लोग लंबे समय से स्वस्थ हैं और अनावश्यक छोटे क्लेम से बचना चाहते हैं।
ऑनलाइन पॉलिसी खरीदें बिचौलियों की लागत कम होने से सीधे छूट मिलती है और तुलना आसान होती है। जो लोग रिसर्च करना पसंद करते हैं और घर बैठे ही विकल्पों की तुलना करना चाहते हैं।
टॉप-अप/सुपर टॉप-अप प्लान एक बेस पॉलिसी के ऊपर अतिरिक्त कवरेज, बड़ी बीमारियों के लिए कम प्रीमियम पर उच्च सीमा। जिनके पास पहले से कोई बेस पॉलिसी है लेकिन अधिक कवरेज चाहते हैं, या जिनकी मौजूदा कवरेज अपर्याप्त है।

टॉप-अप और सुपर टॉप-अप प्लान्स की समझ

मौजूदा कवरेज को मजबूत करें

दोस्तों, कई बार हमारे पास एक बेस हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होती है, लेकिन उसकी कवरेज राशि उतनी ज़्यादा नहीं होती जितनी हमें आज के समय में चाहिए। ऐसे में पूरी पॉलिसी को अपग्रेड करने में बहुत ज़्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है। इसी समस्या का समाधान है टॉप-अप और सुपर टॉप-अप प्लान्स। जब मैंने पहली बार इन प्लान्स के बारे में जाना तो मुझे लगा कि यह कितनी बढ़िया चीज़ है!

ये प्लान्स आपकी मौजूदा पॉलिसी के ऊपर एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। ये उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनकी बेस पॉलिसी कवरेज कम है, लेकिन वे बहुत ज़्यादा प्रीमियम चुकाए बिना अपनी सुरक्षा बढ़ाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपकी बेस पॉलिसी 5 लाख रुपये की है, और आप 10 लाख का टॉप-अप प्लान लेते हैं, तो जब आपका मेडिकल बिल 5 लाख से ऊपर जाएगा, तब टॉप-अप प्लान सक्रिय हो जाएगा। यह आपको एक उच्च कवरेज प्रदान करता है, वो भी बहुत कम प्रीमियम पर, क्योंकि टॉप-अप तभी सक्रिय होता है जब एक निश्चित सीमा पार हो जाए।

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अंतर को समझें: टॉप-अप बनाम सुपर टॉप-अप

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टॉप-अप और सुपर टॉप-अप दोनों ही आपकी कवरेज को बढ़ाते हैं, लेकिन इनके काम करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण अंतर है। एक सामान्य टॉप-अप प्लान किसी एक ही अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में निश्चित ‘डिडक्टिबल’ (वह राशि जो आपको खुद भरनी होती है) के बाद सक्रिय होता है। मान लीजिए, आपने 5 लाख का डिडक्टिबल और 10 लाख का टॉप-अप लिया है। अगर आपका बिल 7 लाख आता है, तो पहले 5 लाख आप अपनी बेस पॉलिसी या जेब से भरेंगे, और बाकी के 2 लाख टॉप-अप से कवर होंगे। वहीं, सुपर टॉप-अप प्लान पूरे पॉलिसी वर्ष में हुए सभी अस्पताल खर्चों का कुल जोड़ देखता है। अगर पूरे साल में आपके कई छोटे-छोटे बिल मिलाकर डिडक्टिबल से ज़्यादा हो जाते हैं, तो सुपर टॉप-अप उन सबको कवर करता है। यह अंतर समझना बहुत ज़रूरी है ताकि आप अपनी ज़रूरतों के अनुसार सही प्लान चुन सकें। मेरी राय में, यदि आप पूरे साल में कई बार अस्पताल जाने की संभावना रखते हैं, तो सुपर टॉप-अप ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है।

स्वस्थ जीवनशैली से प्रीमियम घटाएं

फिटनेस का सीधा फायदा

मुझे खुद महसूस होता है कि जब आप फिट रहते हैं तो न केवल आपका स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बल्कि जेब पर भी कम बोझ पड़ता है। ये तो एक तीर से दो निशाने वाली बात हुई!

स्वस्थ जीवनशैली अपनाना केवल बीमारियों से बचने के लिए ही नहीं, बल्कि आपके हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को कम करने के लिए भी एक शानदार तरीका है। बीमा कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो स्वस्थ होते हैं, धूम्रपान नहीं करते, नियमित व्यायाम करते हैं और अपना वज़न नियंत्रित रखते हैं। ऐसे लोगों को बीमार होने का जोखिम कम होता है, इसलिए बीमा कंपनियां उन्हें कम प्रीमियम पर पॉलिसी देने में संकोच नहीं करतीं। कई बीमा कंपनियां तो अपनी पॉलिसियों में ‘वेलनेस प्रोग्राम’ भी शामिल करती हैं, जहाँ आप अपनी फिटनेस गतिविधियों को ट्रैक करके प्रीमियम पर छूट पा सकते हैं। नियमित रूप से जिम जाना, योग करना, दौड़ना या कोई भी शारीरिक गतिविधि आपको न केवल फिट रखेगी बल्कि आपके प्रीमियम को भी काफी हद तक कम कर सकती है।

धूम्रपान छोड़ें, बचत बढ़ाएं

यह बात तो हम सब जानते हैं कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को भी काफी बढ़ा देता है?

धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को बीमा कंपनियां ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में रखती हैं, क्योंकि उन्हें दिल की बीमारियों, कैंसर और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा ज़्यादा होता है। इसलिए, उन्हें एक गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में काफी अधिक प्रीमियम देना पड़ता है। मैंने कई लोगों को देखा है जिन्होंने धूम्रपान छोड़ दिया और अगले साल उनके प्रीमियम में अच्छी खासी कमी आई। अगर आप वाकई प्रीमियम बचाना चाहते हैं, तो यह एक बहुत ही प्रभावी कदम हो सकता है। सिर्फ़ धूम्रपान ही नहीं, शराब का अत्यधिक सेवन भी आपके प्रीमियम को प्रभावित कर सकता है। एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप न केवल अपनी सेहत सुधारते हैं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई भी बचाते हैं। यह एक ऐसा निवेश है जिसका दोहरा लाभ मिलता है – अच्छा स्वास्थ्य और कम बीमा प्रीमियम।

डिडक्टिबल और को-पेमेंट: छोटी कटौती, बड़ी बचत

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डिडक्टिबल का स्मार्ट चुनाव

कई बार हमें लगता है कि ये छोटे-छोटे विकल्प शायद ज़्यादा फर्क नहीं डालेंगे, पर यकीन मानिए, ये बहुत बड़ा अंतर ला सकते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस में डिडक्टिबल वह राशि होती है जो आपको किसी भी क्लेम के दौरान अपनी जेब से भरनी होती है, इससे पहले कि बीमा कंपनी भुगतान शुरू करे। जब आप एक उच्च डिडक्टिबल का विकल्प चुनते हैं, तो बीमा कंपनी का जोखिम कम हो जाता है क्योंकि वे मानते हैं कि छोटे-मोटे खर्चों के लिए आपको क्लेम करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इस कम जोखिम के बदले, वे आपको प्रीमियम पर छूट देते हैं। मैंने खुद देखा है कि सही चुनाव से कितनी बचत होती है। अगर आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं और छोटी-मोटी आपात स्थितियों के लिए कुछ पैसे बचा कर रखते हैं, तो उच्च डिडक्टिबल चुनना आपके लिए एक बेहतरीन रणनीति हो सकती है। यह आपको मासिक या वार्षिक प्रीमियम में बड़ी बचत करने में मदद करेगा, जबकि बड़ी मेडिकल आपात स्थिति में आपकी सुरक्षा बनी रहेगी। बस यह सुनिश्चित करें कि आप डिडक्टिबल की राशि को आसानी से वहन कर सकें।

को-पेमेंट के नियम और फायदे

को-पेमेंट का मतलब है कि जब आप क्लेम करते हैं, तो क्लेम की कुल राशि का एक निश्चित प्रतिशत आपको खुद भरना होता है, और बाकी बीमा कंपनी भुगतान करती है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी पॉलिसी में 10% को-पेमेंट है और आपका बिल 1 लाख रुपये आता है, तो 10,000 रुपये आपको देने होंगे और 90,000 रुपये बीमा कंपनी देगी। जिस तरह डिडक्टिबल काम करता है, ठीक उसी तरह को-पेमेंट का विकल्प चुनने पर भी बीमा कंपनियां प्रीमियम कम करती हैं। अगर आप अपेक्षाकृत स्वस्थ हैं और आपको लगता है कि आपको शायद ही कभी अस्पताल जाने की ज़रूरत पड़ेगी, तो को-पेमेंट क्लॉज़ वाली पॉलिसी लेना आपके प्रीमियम को काफी कम कर सकता है। लेकिन, यह विकल्प चुनते समय आपको सावधान रहना चाहिए। यदि आपको बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है या आप किसी ऐसी बीमारी से ग्रस्त हैं जिसमें नियमित रूप से बड़े खर्च होते हैं, तो को-पेमेंट वाला प्लान आपके लिए महंगा साबित हो सकता है। अपनी वर्तमान और भविष्य की स्वास्थ्य ज़रूरतों का आकलन करके ही यह फैसला लें कि को-पेमेंट आपके लिए सही है या नहीं।

글을마치며

तो मेरे प्यारे दोस्तों, आपने देखा कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम बचाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ी सी समझदारी और सही जानकारी की ज़रूरत है। मुझे उम्मीद है कि ये सारे तरीके और मेरे अनुभव आपको अपनी सेहत और अपनी जेब, दोनों का ध्यान रखने में मदद करेंगे। याद रखिए, स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है, और सही बीमा इसे सुरक्षित रखने की पहली सीढ़ी है। बस, सही चुनाव करें और अपनी मेहनत की कमाई को समझदारी से बचाएं। मुझे पूरा यकीन है कि आप अब और भी ज़्यादा स्मार्ट तरीके से अपने हेल्थ इंश्योरेंस का प्रबंधन कर पाएंगे।

알아두면 쓸मो 있는 정보

1. अपनी और अपने परिवार की स्वास्थ्य ज़रूरतों का ईमानदारी से आकलन करें। अनावश्यक कवरेज से बचें, इससे आपका प्रीमियम कम होगा।

2. हेल्थ इंश्योरेंस ऑनलाइन खरीदने पर अक्सर आपको बेहतर डील और छूट मिलती है, साथ ही आप आसानी से प्लान्स की तुलना भी कर सकते हैं।

3. नो क्लेम बोनस (NCB) एक बड़ा फायदा है; छोटे-मोटे खर्चों के लिए क्लेम करने से बचें ताकि आप इसे गंवा न दें और भविष्य में प्रीमियम पर छूट पाएं।

4. बेस पॉलिसी के ऊपर टॉप-अप या सुपर टॉप-अप प्लान्स लेने पर कम प्रीमियम में ज़्यादा कवरेज मिलती है, खासकर बड़ी बीमारियों के लिए।

5. स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जैसे धूम्रपान छोड़ना और नियमित व्यायाम करना न केवल आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि आपके इंश्योरेंस प्रीमियम को भी काफी कम कर सकता है।

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중요 사항 정리

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सेहत का ध्यान रखना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है अपनी आर्थिक सेहत का भी ध्यान रखना। मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि हेल्थ इंश्योरेंस में प्रीमियम बचाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बशर्ते हम कुछ स्मार्ट तरीकों को अपनाएं। सबसे पहले, हमें अपनी ज़रूरतों को गहराई से समझना होगा – कौन सी कवरेज हमारे लिए ज़रूरी है और कौन सी नहीं। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे महंगी पॉलिसी ले लेते हैं जिसकी उन्हें पूरी ज़रूरत ही नहीं होती। मेरा मानना है कि अनावश्यक फीचर्स पर पैसे खर्च करने से बेहतर है कि आप अपनी कोर ज़रूरतों पर फोकस करें।

दूसरा सबसे बड़ा टिप है ऑनलाइन खरीद। यह न केवल आपको विभिन्न विकल्पों की तुलना करने का मौका देती है, बल्कि सीधे डील होने के कारण बिचौलियों का कमीशन भी बचता है, जिसका सीधा फायदा आपको कम प्रीमियम के रूप में मिलता है। मुझे याद है जब मैंने पहली बार ऑनलाइन पॉलिसी खरीदी थी, तो मुझे कितनी बचत हुई थी। नो क्लेम बोनस (NCB) को बनाए रखना भी एक शानदार तरीका है। अगर आप स्वस्थ रहते हैं और छोटे-मोटे क्लेम से बचते हैं, तो अगले साल आपको प्रीमियम पर अच्छी खासी छूट मिलती है, जो दीर्घकाल में एक बड़ी बचत बन जाती है।

इसके साथ ही, टॉप-अप और सुपर टॉप-अप प्लान्स उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जिनके पास पहले से कोई बेस पॉलिसी है और वे अपनी कवरेज को बढ़ाना चाहते हैं, वो भी कम खर्च में। अंत में, सबसे प्रभावी तरीका है एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। धूम्रपान छोड़ना, नियमित व्यायाम करना और अपने वज़न को नियंत्रित रखना आपको बीमा कंपनियों की नज़र में ‘कम जोखिम’ वाले ग्राहक बनाता है, जिससे आपको स्वाभाविक रूप से कम प्रीमियम का फायदा मिलता है। इन सभी बातों का ध्यान रखकर आप न केवल अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित कर सकते हैं, बल्कि अपनी जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖

प्र: स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए मैं कौन से स्मार्ट तरीके अपना सकता हूँ जिससे कवरेज भी अच्छी बनी रहे?

उ: अरे वाह! यह सवाल तो हर किसी के मन में आता है और मेरा भी यही अनुभव रहा है कि सही जानकारी के बिना हम अक्सर ज़्यादा प्रीमियम चुका देते हैं। सबसे पहले तो, अपना बीमा कम उम्र में ही ले लें। मैंने देखा है कि जब मैंने अपने भाई को समझाया कि 25 की उम्र में बीमा लेना कितना सस्ता पड़ता है, तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ!
जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता है, और इसलिए प्रीमियम भी बढ़ जाता है। दूसरा, हमेशा अपनी पॉलिसी को ऑनलाइन खरीदो। ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने पर आपको अक्सर डिस्काउंट मिलता है क्योंकि कंपनी के एजेंट का कमीशन बच जाता है। मेरा अपना अनुभव है कि मैंने अपनी एक पॉलिसी ऑनलाइन खरीदी थी, जिस पर मुझे सीधे 10% की छूट मिल गई!
तीसरा, ‘नो-क्लेम बोनस’ (NCB) का ध्यान रखें। अगर आप एक साल में कोई क्लेम नहीं करते हैं, तो आपकी बीमा कंपनी आपको अगले साल प्रीमियम पर छूट देती है या आपकी कवरेज राशि बढ़ा देती है। यह एक बेहतरीन तरीका है जिससे आप अपनी जेब पर पड़ने वाला बोझ कम कर सकते हैं। और हाँ, अपनी लाइफस्टाइल को थोड़ा बेहतर बनाओ। अगर आप धूम्रपान नहीं करते, शराब कम पीते हैं या कोई गंभीर बीमारी नहीं है, तो बीमा कंपनियाँ आपको स्वस्थ जीवनशैली के लिए कम प्रीमियम की पेशकश करती हैं। मैंने अपने एक दोस्त को देखा है, जिसने सिगरेट छोड़ी, तो उसका प्रीमियम काफी कम हो गया। ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी बड़ी बचत करवा सकते हैं।

प्र: क्या अधिक डिडक्टिबल वाली पॉलिसी चुनना प्रीमियम बचाने का एक अच्छा तरीका है? इससे क्या फायदे या नुकसान हो सकते हैं?

उ: यह भी एक बहुत ही प्रैक्टिकल सवाल है और यकीन मानिए, मैंने खुद इस पर काफी रिसर्च की है! डिडक्टिबल का मतलब है वह राशि जो आप बीमा कंपनी के क्लेम देने से पहले खुद वहन करने के लिए सहमत होते हैं। जैसे, अगर आपकी पॉलिसी का डिडक्टिबल 10,000 रुपये है और आपका अस्पताल का बिल 50,000 रुपये आता है, तो पहले 10,000 रुपये आपको देने होंगे और बाकी के 40,000 रुपये बीमा कंपनी देगी। मेरा मानना है कि अगर आप स्वस्थ हैं और आपको लगता है कि आप छोटे-मोटे मेडिकल खर्च खुद उठा सकते हैं, तो अधिक डिडक्टिबल वाली पॉलिसी चुनना एक बहुत ही समझदारी भरा कदम हो सकता है। मैंने अपने एक परिचित को देखा है, जिसने अधिक डिडक्टिबल चुना और उसका सालाना प्रीमियम आधे से भी कम हो गया!
इसका सबसे बड़ा फायदा यही है कि आपका प्रीमियम काफी कम हो जाता है। लेकिन हाँ, इसके कुछ नुकसान भी हैं। अगर आपको अचानक कोई बड़ी बीमारी हो जाती है और आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो आपको शुरुआत में अपनी जेब से एक बड़ी रकम चुकानी पड़ सकती है। इसलिए, यह फैसला लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन ज़रूर कर लें। अगर आपके पास आपातकाल के लिए कुछ बचत है, तो यह विकल्प आपके लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकता है!

प्र: फैमिली फ्लोटर प्लान सिंगल पॉलिसी से कैसे अलग है और क्या यह प्रीमियम बचाने में मदद करता है?

उ: फैमिली फ्लोटर प्लान एक ऐसा प्लान है जिसके बारे में हर परिवार को ज़रूर सोचना चाहिए! मैं खुद हैरान था जब मुझे पहली बार पता चला कि यह कितना फायदेमंद हो सकता है। सिंगल पॉलिसी में हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग बीमा पॉलिसी लेनी पड़ती है, जैसे एक आपके लिए, एक आपकी पत्नी के लिए और एक-एक बच्चों के लिए। इसमें हर पॉलिसी का प्रीमियम अलग से देना पड़ता है, जो काफी महंगा हो सकता है। वहीं, फैमिली फ्लोटर प्लान में एक ही पॉलिसी के तहत परिवार के सभी सदस्य (जैसे आप, आपकी पत्नी और आपके बच्चे) कवर होते हैं। इसमें एक ही सम इंश्योर्ड (बीमा राशि) होती है जो परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा इस्तेमाल की जा सकती है। मेरा अनुभव है कि मेरे दोस्त ने अपनी और अपने बच्चों के लिए अलग-अलग पॉलिसीज़ ली हुई थीं, और जब मैंने उसे फैमिली फ्लोटर प्लान के फायदे बताए, तो उसने तुरंत स्विच कर लिया और उसका प्रीमियम करीब 30-40% कम हो गया!
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सिंगल पॉलिसी के मुकाबले बहुत सस्ता पड़ता है क्योंकि आप एक ही प्रीमियम में पूरे परिवार को कवर कर लेते हैं। दूसरा फायदा यह है कि इसका प्रबंधन करना भी आसान होता है, क्योंकि आपको सिर्फ एक पॉलिसी का ध्यान रखना होता है। हालांकि, इसमें एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि अगर परिवार के एक सदस्य ने पूरी बीमा राशि का उपयोग कर लिया, तो बाकी सदस्यों के लिए कुछ नहीं बचता। लेकिन आमतौर पर, अगर परिवार के सदस्य युवा और स्वस्थ हैं, तो यह एक शानदार और किफायती विकल्प है।